TOPCon सोलर में छिपी कमजोरी अब आएगी सामने! नई टेस्टिंग तकनीक से पहले ही पकड़ में आएंगे नुकसान

आज के दौर में सोलर एनर्जी पूरी दुनिया में तेजी से फैल रही है। भारत हो या ऑस्ट्रेलिया, हर जगह लोग अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं। लेकिन एक बड़ा सवाल हमेशा मन में रहता है कि क्या ये पैनल लंबे समय तक उतनी ही कुशलता से काम करते रहेंगे जितना कंपनियां दावा करती हैं? खासकर TOPCon तकनीक वाले सोलर पैनलों के बारे में यह सवाल और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि ये पैनल अभी बाजार में बड़े पैमाने पर आ रहे हैं।

TOPCon solar weakness revealed

TOPCon सोलर पैनल क्या होते हैं?

TOPCon का मतलब है Tunnel Oxide Passivated Contact। यह एक अत्याधुनिक सोलर सेल तकनीक है जो पारंपरिक PERC तकनीक से ज्यादा एफिशिएंट मानी जाती है। TOPCon सेल्स आमतौर पर 22% से 24% तक की दक्षता हासिल कर सकते हैं, जो PERC के मुकाबले 1 से 2% अधिक है। यही वजह है कि 2024 से 2025 के बीच वैश्विक सोलर मार्केट में TOPCon पैनलों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर 60% से ऊपर पहुंच गई है। लेकिन इस तकनीक में एक छिपी हुई कमजोरी है जो पहले आसानी से पकड़ में नहीं आती थी।

पुरानी टेस्टिंग विधि में क्या कमी थी?

अब तक TOPCon सोलर सेल्स की टिकाऊपन जांचने के लिए एसिटिक एसिड में डुबोकर परीक्षण किया जाता था। UNSW के प्रमुख शोधकर्ता Bram Hoex के अनुसार, यह पारंपरिक तरीका रासायनिक रूप से अवास्तविक परिस्थितियां बनाता था और मॉड्यूल स्तर पर होने वाले असली नुकसान को सही तरह से नहीं दर्शा पाता था। आसान भाषा में कहें तो यह ऐसा था जैसे किसी इंसान की बीमारी जांचने के लिए उसे जरूरत से ज्यादा दवाइयां देकर देखा जाए कि वह कैसे रिएक्ट करता है। इस तरह के परीक्षण से मिले नतीजे भ्रामक होते थे और असली जिंदगी में पैनल की परफॉर्मेंस से मेल नहीं खाते थे।

UNSW की नई क्रांतिकारी टेस्टिंग विधि

ऑस्ट्रेलिया की University of New South Wales (UNSW) के वैज्ञानिकों ने एक नई, बेहद स्मार्ट टेस्टिंग विधि विकसित की है। इस विधि में नाइट्रेट आधारित रसायनों का उपयोग करके एक ऐसा परीक्षण किया जाता है जो असली EVA-एनकैप्सुलेटेड मॉड्यूल के अंदर की हल्की अम्लीय परिस्थितियों की नकल करता है। EVA यानी Ethylene Vinyl Acetate वह पारदर्शी परत होती है जो सोलर सेल को पैनल के अंदर सुरक्षित रखती है।

इस नई विधि की खास बात यह है कि यह सिर्फ सेल के अगले हिस्से (front surface) पर ही परीक्षण करती है, जिससे नतीजे कहीं ज्यादा सटीक और व्यावहारिक होते हैं। शोधकर्ताओं ने 182 mm × 183.75 mm आकार के TOPCon सेल्स पर यह परीक्षण किए, जो n-type Czochralski सिलिकॉन वेफर्स से बने थे।

दो प्रकार के सेल्स पर परीक्षण के नतीजे

पैरामीटरAg/Al पेस्ट वाले सेलAg/LAF (लेजर-असिस्टेड) सेल
एसिडिक परिस्थितियों में संवेदनशीलताकमअधिक
मैकेनिकल मजबूतीज्यादा (Al spikes की वजह से)कम
डिलैमिनेशन का खतराकमज्यादा
Fill Factor नुकसानसीमितउल्लेखनीय
PbO ग्लास फ्रिट की मोटाईअधिकपतली परत

परीक्षण से पता चला कि Ag/LAF तकनीक वाले सेल्स एसिडिक परिस्थितियों में ज्यादा कमजोर पड़ते हैं और उनमें front-contact delamination की समस्या ज्यादा देखने को मिली।

किन रसायनों से होता है सबसे ज्यादा नुकसान?

शोध में यह भी सामने आया कि सभी रसायन एक जैसा नुकसान नहीं करते। Aluminium Nitrate और Chloride वाले नमक सबसे ज्यादा नुकसानदायक पाए गए। Zinc Nitrate के साथ किए गए परीक्षण के नतीजे मॉड्यूल-लेवल परफॉर्मेंस से काफी मिलते-जुलते निकले। न्यूट्रल नमक के घोल का असर बहुत कम पाया गया, जबकि अम्लीय नाइट्रेट घोल ने PbO ग्लास फ्रिट को तेजी से नष्ट किया।

भारत के लिए यह खोज क्यों है खास?

भारत में सोलर ऊर्जा का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जिसमें सोलर की बड़ी भूमिका है। ऐसे में अगर लाखों की संख्या में लगाए जा रहे TOPCon पैनल समय से पहले खराब होने लगें तो यह एक बड़ी आर्थिक और ऊर्जा संबंधी समस्या बन सकती है। इस नई टेस्टिंग विधि से पैनल निर्माता कंपनियां अपने उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले ही उसकी कमजोरियां पकड़ सकती हैं और उन्हें ठीक कर सकती हैं।

इस तकनीक के फायदे

यह नई विधि 1,000 घंटे से अधिक लंबे मॉड्यूल-लेवल damp-heat परीक्षण की तुलना में कहीं कम समय में नतीजे देती है। इससे निर्माताओं का विकास समय और लागत दोनों कम होते हैं। Hoex के अनुसार यह एक तेज और भौतिक रूप से सार्थक स्क्रीनिंग टूल है जो पूर्ण मॉड्यूल असेंबली से पहले ही विश्वसनीयता जोखिमों की पहचान कर लेता है।

संक्षेप में कहें तो

यह शोध Chemical Engineering Journal में प्रकाशित हुआ है और यह साबित करता है कि सही तरीके से डिज़ाइन किए गए सेल-लेवल परीक्षण, मॉड्यूल-लेवल पर दिखने वाली असली खराबी को पहले ही पकड़ सकते हैं। सोलर उद्योग के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है जो आने वाले वर्षों में पैनलों की गुणवत्ता और टिकाऊपन को एक नए स्तर पर ले जाएगी।

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