Perovskite Solar Cell में आया बड़ा बदलाव: 25.56% Efficiency के साथ हाई टेम्परेचर और नमी में भी शानदार स्टेबिलिटी

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सौर ऊर्जा को एक महत्वपूर्ण समाधान माना जा रहा है। लेकिन सौर ऊर्जा को सच में प्रभावी बनाने के लिए सोलर सेल्स की दक्षता (Efficiency) और लंबे समय तक टिकाऊपन (Long-term Stability) दोनों का एक साथ होना जरूरी है। अब तक वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ी दुविधा थी कि जब भी वे सोलर सेल की Efficiency बढ़ाते थे, तो उसकी उम्र घट जाती थी और जब उसे ज्यादा टिकाऊ बनाते थे, तो Efficiency गिर जाती थी। इस “Solar Cell Dilemma” को साउथ कोरिया के KAIST (Korea Advanced Institute of Science and Technology) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक साथ हल कर दिखाया है।

Perovskite Solar Cell Achieves 25 percent Efficiency

क्या है Perovskite Solar Cell और क्यों है यह खास?

Perovskite एक विशेष प्रकार की क्रिस्टल संरचना वाला मटेरियल है जो सूरज की रोशनी को बड़ी दक्षता से बिजली में बदल सकता है। पारंपरिक सिलिकॉन सोलर सेल्स की तुलना में Perovskite Solar Cells को बनाना काफी सस्ता है और इनकी Efficiency भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। 2025 तक, सबसे उन्नत सिंगल-जंक्शन Perovskite सोलर सेल की Power Conversion Efficiency 27.3% तक पहुंच गई है, जिसे National Renewable Energy Laboratory ने प्रमाणित किया है। इसके अलावा, Perovskite-Silicon Tandem सेल्स की Efficiency 34% से भी अधिक हो चुकी है।

हालांकि, इन सेल्स की एक बड़ी कमजोरी रही है। Perovskite सेल्स पारंपरिक सिलिकॉन सेल्स की तुलना में बहुत जल्दी खराब होने लगते हैं, जबकि सिलिकॉन सेल्स 25 से 30 साल तक चल सकते हैं। यही कारण है कि इनका व्यावसायिक उपयोग अभी तक सीमित रहा है।

KAIST की टीम ने क्या किया नया?

KAIST के Chemical and Biomolecular Engineering विभाग के Distinguished Professor Jangwon Seo के नेतृत्व में एक शोध दल ने Korea Research Institute of Chemical Technology (KRICT) के साथ मिलकर एक अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है। इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल Joule में प्रकाशित किया गया है।

इस टीम ने Perovskite Solar Cell की सतह पर एक खास 2D Passivation Layer डिज़ाइन की, जो सेल की आंतरिक संरचना को मजबूत बनाती है। इससे पहले वैज्ञानिक 3D/2D स्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी का उपयोग करते थे, जिसमें 3D Perovskite Layer के ऊपर एक 2D Layer जोड़ी जाती थी। यह तरीका सतह के दोषों को कम करने और स्टेबिलिटी सुधारने में मदद करता था। लेकिन अगर 2D Layer की संरचना पर्याप्त मजबूत नहीं होती, तो समय के साथ वह विकृत हो जाती थी और सेल की परफॉर्मेंस धीरे-धीरे गिरने लगती थी।

DJ Structure: ईंटों को मजबूत गोंद से जोड़ना

इस समस्या को हल करने के लिए KAIST की टीम ने Dion-Jacobson (DJ) Type 2D Perovskite Passivation Layer का उपयोग किया। इस DJ स्ट्रक्चर में Perovskite Layers को दोनों तरफ से Organic Molecules द्वारा मजबूती से जोड़ा जाता है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह ऐसे है जैसे ईंटों को दोनों तरफ से मजबूत गोंद से बांध दिया जाए ताकि वे आसानी से न टूटें।

इससे भी आगे, शोध टीम ने “n Value” को सटीक तरीके से नियंत्रित करने की एक रणनीति भी प्रस्तुत की। n Value यानी 2D Passivation Layer के अंदर Perovskite Layers की Stack संख्या। Heat Treatment की प्रक्रिया के दौरान तापमान और समय को नियंत्रित करके इस स्ट्रक्चर को वांछित रूप दिया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ईंट जोड़ने के बाद गोंद को सुखाते समय तापमान और समय को नियंत्रित करके एक अधिक ठोस और व्यवस्थित संरचना तैयार की जाती है। इसके परिणामस्वरूप Charge Transport अधिक कुशल हो गया, जिससे Efficiency में वृद्धि हुई और DJ Structure की मजबूती ने दीर्घकालिक स्थिरता को भी बेहतर बनाया।

परिणाम: 25.56% Efficiency और जबरदस्त Stability

इस डिज़ाइन स्ट्रेटेजी को लागू करने वाले Perovskite Solar Cell ने शानदार नतीजे दिए।

पैरामीटरपरिणाम
Power Conversion Efficiency25.56%
Certified Efficiency25.59%
स्टेबिलिटी टेस्ट तापमान85°C
स्टेबिलिटी टेस्ट आर्द्रता85% Relative Humidity (RH)
अतिरिक्त परीक्षणलगातार प्रकाश एक्सपोजर में भी स्थिर
अनुप्रयोगLarge-Area Modules में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन

यह सेल 85°C तापमान और 85% Relative Humidity जैसी कठोर परिस्थितियों में भी उच्च स्तर की परफॉर्मेंस बनाए रखने में सफल रही, साथ ही लगातार प्रकाश के संपर्क में आने पर भी दीर्घकालिक स्थिरता की पुष्टि हुई।

व्यावसायिक उपयोग के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण?

2025 में Perovskite Photovoltaics ने एक परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश किया है, जिसमें Tandem Device Integration में तेजी से प्रगति और दीर्घकालिक Operational Stability में सुधार जैसी उपलब्धियां शामिल हैं। KAIST की इस खोज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह तकनीक Process Conditions में बदलाव के बाद भी अपेक्षाकृत स्थिर रूप से काम करती है।

Professor Jangwon Seo ने कहा, “इस अध्ययन से यह सिद्ध होता है कि Efficiency बढ़ाने से Lifespan घटती है और Lifespan बढ़ाने से Efficiency घटती है, इस दीर्घकालिक चुनौती को Surface Passivation Layer के Structural Design के माध्यम से एक साथ हल किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह तकनीक व्यावसायिक उत्पादन के लिए Large-Area Manufacturing Processes में मददगार साबित होगी।

आगे की राह

Perovskite Solar Cell की यह उपलब्धि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। Oxford PV जैसी कंपनियां पहले ही Tandem Panels को Utility-Scale Installation के लिए भेज चुकी हैं और भविष्य में Gigawatt Scale उत्पादन की योजना बना रही हैं। KAIST की यह शोध इस दिशा में और गति देगी। जब Efficiency और Stability दोनों एक साथ हासिल होती हैं, तो Perovskite Solar Cells का व्यावसायिक भविष्य और भी उज्ज्वल नजर आता है। यह तकनीक न केवल ऊर्जा उत्पादन की लागत को कम करेगी बल्कि हमारी ऊर्जा प्रणाली को कार्बन मुक्त बनाने के वैश्विक लक्ष्य को भी हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।

Leave a Comment